सदाचार और सद् व्यवहार ही मनुष्य जीवन का मूल-पं रामाश्रय उपाध्याय

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सात दिवसीय महापुराण कथा का समापन

राजातालाब।शाहंशाहपुर में आयोजित भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुए राजकीय इंटर कॉलेज जक्खिनी के पूर्व प्रधानाचार्य मानस मर्मज्ञ पंडित रामाश्रय उपाध्याय ने कहा कि भारतीय शास्त्र सद्व्यवहार और सद्आचरण की ओर संकेत करते हैं। भारतीय ऋषि परंपरा ने अपने पूर्वजों और जीव मात्र से प्रेम से रहने की बातें बताई हैं। कहा कि भारतीय अपने पुरखों को तर्पण परंपरा से याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। यह सब विधियां पुरखों ने अनुसंधान और अध्ययन के बाद अपने वंशजों को सौंपी है।शाहंशाहपुर में आयोजित ज्ञान यज्ञ कथा को व्यास पीठ से पंडित रामसेवक ने भी भक्तजनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानव मात्र की सेवा से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है। कहा कि भारतीय मनीषियों ने मनुष्य मनुष्य में प्रेम भावना की बातें बताई और सिखाई हैं। कहां की विश्व में भारत ही ऐसा देश है जो वासुधैव कुटुंबकम् की बात करता है।एक छोटे जीव के प्रति भी उदारता पूर्वक व्यवहार करने की बातें सिखाई गई है। यहां पर यह भागवत महापुराण कथा 7 दिनों तक आयोजित हुआ। इस दौरान यजमान अनिल कुमार मिश्रा अवधेश मिश्रा किरण मिश्रा ने कथा प्रेमियों का स्वागत और सत्कार किया।
संपूर्ण कार्यक्रम में नील रतन मिश्रा, दीनानाथ मिश्रा, कृष्ण कुमार मिश्रा, रंगनाथ मिश्रा, अंबरीश मिश्रा,नीलमणि मिश्रा, मंसाराम मिश्रा, गोपी यादव, हरिप्रसाद सिंह,वाहिद खाँ, पीयूष गौरव, प्रशांत मिश्रा सहित भारी सारी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

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