
दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के सानिध्य में मंदिर के देव विग्रहों को 25 क्विंटल ठंडई और 21 हजार केले का भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में हजारों भक्तों में प्रसाद रूप में वितरित किया गया।
मंदिर में स्थापित 111 नर्वदेश्वर शिवलिंग, द्वादश स्फटिक शिवलिंग, पारदेश्वर शिवलिंग सहित श्रीराम दरबार, माँ अन्नपूर्णा, प्रथमेश गणेश, भगवती दुर्गा और राधेकृष्ण का आकर्षक श्रृंगार किया गया। मुख्य मंडप में स्थापित पाँच फीट ऊँचे नर्वदेश्वर शिवलिंग का महाकाल रूप में विशेष अलंकरण हुआ तथा पुजारी राजीव लोचन ने प्रातःकाल भव्य भस्म आरती संपन्न कराई। तड़के 4 बजे मंगला आरती के साथ पट खुले और दिनभर पूजन-अर्चन का क्रम जारी रहा।
सायंकाल जबलपुर से आए भजन गायक डॉ. राम सरकार ने शिव भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। आयोजन धर्मसंघ महामंत्री पं. जगजीतन पाण्डेय के आचार्यत्व में संपन्न हुआ।
