वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की छात्राओं ने खो-खो अंतर विश्वविद्यालयी खेल प्रतियोगिता में टीम न भेजे जाने को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने लगभग दो महीने तक लगातार सुबह-शाम कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास किया, विभिन्न शारीरिक व खेल परीक्षणों को पास करने के बाद उन्हें चयनित भी किया गया था, लेकिन प्रतियोगिता से ठीक दो दिन पहले उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।

छात्राओं के अनुसार फकीर मोहन विश्वविद्यालय, उड़ीसा में आयोजित होने वाली अंतर विश्वविद्यालयी खो-खो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुल 12 छात्राओं का चयन किया गया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीम को प्रतियोगिता में भेजने की तैयारी चल रही थी, तभी अचानक उन्हें सूचित किया गया कि वे प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अयोग्य हैं।

छात्राओं ने कहा कि पहले चयनित करना और फिर अंतिम समय में अयोग्य घोषित कर देना पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। यह न केवल उनकी मेहनत और समर्पण का अपमान है, बल्कि उन्हें खेल के अधिकार से भी वंचित किया जा रहा है।

छात्राओं ने कुलपति से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से टीम को उड़ीसा भेजने का आदेश दिया जाए, ताकि उनका अथक परिश्रम सार्थक हो सके और वे विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व कर सकें। छात्राओं का कहना है कि यदि छात्राओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगी। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
चयनित छात्राओं में शामिल हैं—
सभीक्षा शर्मा
अंजली पटेल
आरती यादव
सोना
प्रियंका सिंह पटेल
शिवानी कुमारी
खुशी कुमारी
शिवांशी
स्नेहा
संगीता कुमारी
रामा
सपना सिंह

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