वाराणसी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी के एक संकाय सदस्य की सहभागिता वाला एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature Immunology में प्रकाशित हुआ है। इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र की विश्व की अग्रणी पत्रिकाओं में शामिल इस जर्नल का पाँच वर्षीय प्रभाव कारक (Impact Factor) 29.2 है। “Phosphorylation of Runx protein controls helper CD4⁺ T cell versus cytotoxic CD8⁺ T cell lineage choice” शीर्षक से प्रकाशित इस शोध में एक महत्वपूर्ण आणविक तंत्र का पता लगाया गया है, जो यह निर्धारित करने में भूमिका निभाता है कि मानव शरीर की प्रमुख प्रतिरक्षा कोशिकाएँ किस प्रकार विकसित होती हैं और अपना कार्य करती हैं।

इस शोध में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आदित्य कुमार पाधी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह अध्ययन जापान के शोधकर्ताओं के साथ सहयोग से सम्पन्न हुआ। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि Runx प्रोटीन में होने वाला एक सूक्ष्म रासायनिक परिवर्तन यह प्रभावित करता है कि विकसित हो रही प्रतिरक्षा कोशिकाएँ CD4⁺ हेल्पर T कोशिकाएँ बनेंगी—जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय करती हैं—या CD8⁺ साइटोटॉक्सिक T कोशिकाएँ—जो संक्रमित अथवा कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को सीधे नष्ट करती हैं।
इन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के विभेदन (डिफरेंशिएशन) की प्रक्रिया को समझना प्रतिरक्षा तंत्र के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और भविष्य में इम्यूनोथेरेपी, वैक्सीन विकास तथा प्रतिरक्षा-संबंधी रोगों के उपचार में नई संभावनाएँ खोल सकता है। डॉ. पाधी ने इस अध्ययन में उन्नत कम्प्यूटेशनल स्ट्रक्चरल विश्लेषण के माध्यम से योगदान दिया। इसमें नॉन-नेचुरल अमीनो एसिड आधारित मॉडलिंग, एसेंशियल डायनेमिक्स तथा बाइंडिंग फ्री-एनर्जी विश्लेषण जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया। उनके कार्य ने यह समझने में मदद की कि यह आणविक परिवर्तन Runx1 प्रोटीन की संरचना और कार्य को किस प्रकार प्रभावित करता है तथा इसके परिणामस्वरूप T-कोशिकाओं के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए डॉ. पाधी ने कहा, “यह कार्य दर्शाता है कि कम्प्यूटेशनल स्ट्रक्चरल मॉडलिंग और प्रायोगिक इम्यूनोलॉजी के समन्वय से हम जैविक तंत्र के मूलभूत पहलुओं को समझ सकते हैं। ऐसे सहयोगात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहन देने वाले बहुविषयक वातावरण के लिए मैं आईआईटी (बीएचयू) और संस्थान के नेतृत्व का आभारी हूँ।” इस उपलब्धि पर शोध दल को बधाई देते हुए आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक Prof. Amit Patra ने कहा कि यह प्रकाशन अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में संस्थान की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है। यह प्रकाशन वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग में आईआईटी (बीएचयू) के शोधकर्ताओं की बढ़ती भूमिका तथा जैव-चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान के विस्तार में उनके योगदान को भी रेखांकित करता है।
