वाराणसी में मौनी अमावस्या पर आस्था का महासंगम, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में पुण्य की डुबकी

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वाराणसी। माघ मास की पावन मौनी अमावस्या के अवसर पर काशी में आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के भोर से ही दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, तुलसी घाट, राजघाट, केदार घाट और हरिश्चंद्र घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।मौनी अमावस्या को स्नान-दान का विशेष महत्व माना जाता है।

इसी परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद गरीबों और असहायों को अन्न, वस्त्र, कंबल, फल व अन्य जरूरत का सामान वितरित किया। घाटों के आसपास दान-पुण्य करते श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया।सुबह से ही “हर-हर गंगे” और “बोल बम” के जयकारों से घाट गूंजते रहे। कई श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों से काशी पहुंचे थे। साधु-संतों और अखाड़ों के संन्यासियों ने भी गंगा स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान किए। वहीं, पर्यटकों ने भी इस अद्भुत नजारे को कैमरों में कैद किया।प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, एनडीआरएफ और जल पुलिस की तैनाती रही। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई थी और जगह-जगह सीसीटीवी से निगरानी की जा रही थी। नगर निगम द्वारा साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था की गई, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी एंबुलेंस के साथ तैनात रहीं।श्रद्धालुओं का कहना था कि मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया। मौनी अमावस्या पर काशी एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और सेवा के रंग में रंगी नजर आई, जहां गंगा घाटों पर उमड़ा जनसैलाब भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की जीवंत तस्वीर पेश करता रहा।

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