
वाराणसी स्थित बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) कर्मचारी परिषद् ने रेलवे बोर्ड द्वारा बरेका की उत्पादन इकाई को अगले चार वर्षों के लिए Periodic Overhaul (POH) कार्य सौंपे जाने के निर्णय का विरोध किया है। परिषद् के संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार यादव ने महाप्रबंधक को भेजे ज्ञापन में कहा कि बरेका की स्थापना आधुनिक विद्युत एवं डीजल रेल इंजनों के निर्माण के लिए हुई थी। वर्तमान में भारतीय रेल वंदे भारत, अमृत भारत और बुलेट ट्रेन जैसी आधुनिक परियोजनाओं पर कार्य कर रही है, ऐसे में उत्पादन इकाई को POH कार्य देना उसकी मूल उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता के बेहतर उपयोग में बाधा बन सकता है।
परिषद् के सदस्यों का कहना है कि निर्माण और ओवरहालिंग कार्य की प्रकृति अलग-अलग होती है, जिससे उत्पादन कार्य प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि POH कार्य परंपरागत रूप से जोनल रेलवे की कार्यशालाओं और शेडों में किया जाता रहा है, जहां इसके लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध है। परिषद् का मानना है कि बरेका के अभियंता और कर्मचारी आधुनिक रेल इंजनों के निर्माण में विशेषज्ञ हैं और उनकी क्षमता का उपयोग नई उत्पादन परियोजनाओं में किया जाना चाहिए। परिषद् ने महाप्रबंधक से रेलवे बोर्ड के समक्ष यह मामला प्रभावी ढंग से उठाकर निर्णय पर पुनर्विचार कराने की मांग की है।
